चंडीगढ़(The mirror punjab’) -शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा संचालित बाबा बंदा सिंह बहादुर सिंह इंजीनियरिंग कालेज फतेहगढ़ पिछले कुछ सालों से मैनेजमेंट की गलतियों की वजह से अपनी प्रतिष्ठता खोता जा रहा है। किसी जमाने में सिख कौम के इस सिरमोर शैक्षिक संस्थान का पंजाब भर में बड़ा रुतबा माना जाता रहा है लेकिन मौजूदा मैनेजमेंट की लापरवाही एवं गलत प्रबंधन की वजह से कोई भी अभिभावक अब अपने बच्चों को इस कालेज में दाखिल करवाने को तैयार नही है। दाखिले ना होने से कालेज आर्थिक मंदहाली के दौर से गुजर रहा है, जिसके चलते अधिक्तर स्टाफ को 10 माह से वेतन नही मिल सका। अगर कोई स्टाफ ज्यादा जोर डालता है तो उसे 50 फीसदी वेतन देकर टरका दिया जाता है।
25 सालों से चल रहे कालेज की इतनी बुरी स्थित बारे यकीन करना मुशकिल हो रहा जबकि चंडीगढ़ युनीवर्सिटी, चितकारा युनीवर्सिटी और इलाके के अन्य कालेजों मेंं दाखिलों की स्थित इतनी बुरी कही भी नही है। ऐसे हालातों की वजह से बहुत सारा स्टाफ सेलरी ना मिलने के कारण लीव विधाउट पे पर चला गया है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का सारा बोझ गैर तजुर्बेकार कंट्रेक्ट स्टाफ पर आ गया है जबकि कोरोना काल दौरान आन लाइन पढ़ाई के लिए सीनियर स्टाफ की ज्यादा जरुरत थी। ऐसी परस्थियों की वजह से पिछले छह साल से कालेज की करीब 70 फीसदी सीटें खाली पड़ी है। उधर इलकट्रोनिक एंड कम्पयूनिकेशन इंजीनियरिंग में पिछले चार साल से 10 से 15 फीसदी और एग्रीकलचर इंजीनियर में पिछले चार साल से करीब 10 फीसदी ही दाखिला हो सका है। एमटैक पावर सिस्टम में तो ओर भी ज्यादा बुरी स्थित है। पिछले चार सालों दौरान सिर्फ पांच एडमिशन ही हो सके है। एमटैक सीएसई में पिछले साल सिर्फ 7 ही दाखिलें हुए है। इलेकट्रिकल इंजीनियरिंग में थोड़ी सी स्थित कुछ ठीक है, जिसमें पिछले चार साल से 30 से 35 प्रतिशत तक एडमिशन हो रही है। बीवीओसी के दो कोर्सों में पिछले साल बीवीओसी साफ्टवेयर डिवलपेंट में सिर्फ 14 और बीवीओसी आटो मोबाइल इंजीनियरिंग में मात्र 13 दाखिलें ही हो सके है।
कालेज के दयनीय हालातो बारे पुराने विद्यार्थियों का कहना है कि कालेज में अब पढ़ाई का माहोल नही रहा है। कालेज प्रबंधक एक दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में कालेज की शाख को दाव पर लगा रहे है, जिसके चलते कोई भी मां बाप अपने बच्चों को ऐसे कालेज में भेजने से घबरा रहा है। इस कालेज के विद्यार्थियों की कही प्लेसमेंट भी नही हो रही है। अगर कोई विद्यार्थी अपनी कोशिशों से प्लेसमेंट पा भी लेता है तो कालेज वाले उसे अपनी प्लेसमेंट बता कर अपनी नौकरियां बचाने में लग जाते है। कालेज की दयनीय स्थित बारे स्टाफ के कुछ सद्स्यों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि कालेज प्रबंधन के गलत फैसले ही मौजूूदा हालतों के लिए जिम्मेदार है। कालेज में विद्यार्थियों का अकाल पड़ रहा और प्रबंधक की तरफ से सात मंजिला स्टूडैंट होस्टल बना दिया गया जबकि उस समय विद्यार्थियों की संख्या रोजाना कम हो रही थी। पुराने ब्लाक खाली रहने के बावजूद भाई गुरदास फुली एसी हाल बनाने का पैसला भी कालेज को मदहाली की ओर धकेलने वाला कदम था।
इस संबंध में एसजीपीसी प्रधान बीबी जागीर कौर से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि कालेज के ऐसे हालातों से पहले वह वाकिफ नही थी। अब यह मामला उनके ध्यान में आ गया है, जिसकी जांच करवाने के बाद उचित कारवाई करते हुए शिरोमणि कमेटी के इस नामी कालेज की तमाम कमियों पेशियों को दूर करके उसके पुरातन स्वरुप को बहाल करवाया जाएगा।





